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दिल्ली … सेंगोल पर सियासत, कांग्रेस बोली- संगोल पर भाजपा के दावे झूठे: कोई दस्तावेज नहीं, जिसमें नेहरु या लॉर्ड माउंटबेटन ने इसे सत्ता का हस्तांतरण का प्रतीक बताया

Pic Credit: https://sengol1947ignca.in

देश की नई संसद के उद्घाटन में अब 2 दिन का ही समय बचा हैं… लेकिन इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा विवाद गरमाता जा रहा है … नई संसद के उद्घाटन के पहले बीजेपी सरकार द्वारा सेंगोल स्थापित करने को लेकर दी गई जानकारी और दावों को कांग्रेस ने झूठा करार दिया है… कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेजी या पुख्ता सबूत नहीं है कि सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर ब्रिटिश सत्ता के हस्तांतरण के समय पूर्व पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था… इससे जुड़े सभी दावे गलत हैं। वही कांग्रेस के इस आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया है … उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों ने सेंगोल को वॉकिंग स्टिक समझा और संग्रहालय में भेज दिया था… प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को नए संसद भवन का इनॉग्रेशन करेंगे…

14 अगस्त 1947 की रात थिरुवदुथुरै अधीनम के प्रतिनिधि श्री ला श्री कुमार स्वामी थम्बिरन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को सुनहरा राजदंड भेंट किया था। बीजेपी सरकार ने इस फोटो को जारी किया था ।Pic Credit: https://sengol1947ignca.in

वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से झूठ फैलाया जा रहा- जयराम रमेश

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट में लिखा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि नई संसद को वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से मिले ज्ञान से दूषित किया जा रहा है… बीजेपी-आरएसएस बिना सबूत के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है… उन्होंने कहा, सेंगोल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण बीजेपी का एक बार फिर से पर्दाफाश हो गया है…

‘यह सच है कि सेंगोल (राजदंड), जिसे तत्कालीन मद्रास प्रांत में एक सनातन समूह ने बनाया था और मद्रास में ही तैयार करने के बाद अगस्त 1947 में देश के तत्कालीन PM जवाहर लाल नेहरू को सौंपा गया था… लेकिन इस बात का भी कोई भी दस्तावेजी सबूत नहीं है कि माउंटबेटन, राजाजी और नेहरू ने इस राजदंड को भारत में ब्रिटिश सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बताया हो या कहा हो …. इससे पता चलता है कि इनके सभी दावे पूरी तरह से झूठे और बोगस हैं… हो सकता है उनको यह ज्ञान वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से मिला हो।’

‘राजदंड को बाद में इलाहाबाद संग्रहालय में रखा गया….14 दिसंबर  1947 को नेहरू ने वहां जो कुछ कहा, वह सार्वजनिक रिकॉर्ड में है… भले ही उस पर लगा हुआ लेबल कुछ भी कहे।’

‘PM और उनका प्रचार करने वाले राजदंड का इस्तेमाल अब तमिलनाडु में अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं… इन लोगों के पास अपने हितों के लिए तथ्यों को उलझाने की विशेषज्ञता है।’

शाह बोले- कांग्रेस ने सेंगोल को ‘वॉकिंग स्टिक’ समझा

वही केंद्रीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सेंगोल के विरोध को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा … उन्होंने ट्वीट किया और लिखा कि कांग्रेस पार्टी भारतीय परंपराओं और संस्कृति से इतनी नफरत क्यों करती है?  पंडित नेहरू को तमिलनाडु के एक पवित्र शैव मठ द्वारा भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में पवित्र सेंगोल दिया गया था… कांग्रेस ने इसे ‘वॉकिंग स्टिक’ समझकर संग्रहालय में भेज दिया… कांग्रेस इतिहास को गलत बता रही है… कांग्रेस को अपनी सोच पर मंथन करने की जरूरत है..

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